Mera Sangharsh
रिश्ते में औरत |
Spandan
रे मनवा मेरे! |
जीत
Sunday, 19 May 2013 12:26:58 hrs IST
आज मुझे एहसास हो गया है कि वफा घर में ही मिलती है। पत्नी से बेवफाई करने वाले मर्द कहीं सुख नहीं पाते। बाहर की दुनिया बड़ी मायावी है। बहुत छलावा है। लेकिन लौटकर सबको घर ही आना पड़ता है। और आज मैं भी लौट आया हूं।
खारा प्यार
Sunday, 05 May 2013 10:53:02 hrs IST
सु गंधा आसमानी सी होती जा रही थी। मैं अपने हरे भरे फूलों के बगीचे में कांटे चुन रहा था। कांटों का एक कायदा है, ये सूखने पर अपना रंग भले ही बदल ले, रूप नही बदलते। जबकि फूल सूखकर झड़ जाते हंै, बिखर जाते हंै, समेटना
कविता को नया मुहावरा
Sunday, 17 Mar 2013 10:15:34 hrs IST
ए क सजग कला समीक्षक जब एक संवेदनशील कवि भी होता है तो उसकी कविताएं सहज ही प्रभावशाली शब्दचित्रों का रेखांकन करती हैं। कला समीक्षक डॉ. राजेश कुमार व्यास का कविता संग्रह 'कविता देवै दीठ' यानी 'कविता दृष्टि देती है' में ए
अपना-अपना सुख
Sunday, 17 Mar 2013 10:17:21 hrs IST
मन्द-मन्द बरसाती बयार में मिट्टी की सौंधी-सौंधी गंध कमल के नथुनों में सुनीता के बदन की गंध की तरह समाती जा रही थी। कमल उसी उमस से बेहाल था, मगर फिर भी वह मन ही मन बहुत खुश
होटल
Sunday, 03 Mar 2013 10:10:10 hrs IST
पता नहीं यह कहानी है कि कुछ और है.. अगर 'कुछ और' भी हो तो क्या फर्क पड़ता है...? यह कहानी 'कुछ और' की है।हां... ठीक सोचा आपने। वह कुछ ऎसा ही था। 'कुछ और' ही था। दुçन्
सड़क उदास है
Sunday, 24 Feb 2013 9:36:53 hrs IST
आज भी सूरज सड़क की पूर्वी बहुमंजिला इमारत इलेक्ट्रोनिक्स टुडे के ऊपर से निकला, ये दिन की सामान्य शुरूआत है। सुबह-सुबह थोड़ी आवाजाही है। चौराहे के पास रामप्रसाद ने चाय का ठेला सजा

