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बुधवार, 10 मार्च, 2010
हम पुरूषों से बेहतर हैं
03 फरवरी 2010, 12:03 hrs IST
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deepika padukone
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दीपिका पादुकोण ने फिल्मों में आधुनिक, कामकाजी महिला की भूमिकाएं की हैं। वे बता रही हैं आज की दुनिया में औरत होने की अहमियत।

काम की जगह पर जो चुनौतियां होती हैं, क्या उनके सामने आप खुद को मदोंü के बराबर  पाती हैं
भगवान ने औरतों को इतनी क्षमता दी है कि वे खुद को वक्त केअनुरूप ढाल लेती हैं। जब मैं घर से बाहर कदम रखती हूं, तो मुझे महसूस होता है कि मैं आज की एक जिम्मेदार औरत हूं और मैं जानती हूं कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं करना है।

क्या आप एक औरत होकर खुश हैं
ईमानदारी से कहूं तो मैंने अब तक इस बारे में कभी सोचा ही नहीं। जाहिर है कि मैं स्त्री-पुरूष की भिन्नता को ज्यादा अहमियत ही नहीं देती और खास बात तो यह है कि मैं पुरूषों से किसी बात में कमतर नहीं, बेहतर हूं।

अच्छा, .... तो फिर यह बताइए कि आपने यह क्यों कहा कि आप औरत होकर खुश हैं
मैं खुश इसलिए हूं कि मैं एक बेटी हो सकती हूं, एक गर्ल फ्रैंड हो सकती हूं, पत्नी हो सकती हूं, मां हो सकती हूं, एक कॅरियर वुमन हो सकती हूं, एक हाउसवाइफ हो सकती हूं। एक ही जिंदगी में मुझे न जाने कितने अलग-अलग तरह के रूप धरने का मौका मिलता है। न तो मैं तुलना करना चाहती हूं और न इस बात की पडताल ही करना चाहती हूं कि एक मर्द भी ऎसा कर सकता है या नहीं। खास बात यह है कि यह सब मुझे बेहद सुकून भरा लगता है। एक औरत के बारे में जो बात बहुत महžवपूर्ण है वह यह कि उसमें एक साथ कई जिम्मेदारियों को निभाने की क्षमता होती है।

क्या आप अपने इर्द-गिर्द कुछ ऎसे फीमेल रोल मॉडल्स पाती हैं, जिन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं के बीच संतुलन बनाए रखने में सफलता पाई है
मेरी मां (उज्जला) हमेशा ही मेरे लिए प्रेरणा का स्त्रोत रही हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी दोनों जिंदगियों - प्राइवेट और प्रोफेशनल के बीच बेहद खूबसूरत संतुलन कायम रखा। उन्होंने मेरे पिता (प्रकाश) को, मेरी बहन अनिशा को और मुझे भी सहारा दिया। एक हाउसवाइफ होने के साथ ही मेरी मां एक प्रोफेशनल भी थीं। वे ट्रेवल बिजनेस में थीं, लेकिन उन्होंने अपने काम की व्यस्तताओं के बीच भी अपने परिवार और बच्चों के लिए वक्त निकाला। मेरी बहन के और मेरे जन्म से पहले उन्होंने मेरे पिता को सहारा दिया, जो स्पोट्र्स में थे। जब मैंने एक्टिंग प्रोफेशन अपनाने का फैसला किया, तो वे मेरे पीछे चट्टान की मानिंद खडी हुईं।

लडकी होने की वजह से क्या घर पर किसी तरह के भेदभाव का सामना करना पडा
कभी नहीं, इसलिए भी मैं एक स्त्री के रूप में जन्म लेकर  खुश हूं। मेरे मम्मी-पापा ने कभी भी मुझसे इस कारण कोई दुर्व्यवहार नहीं किया कि मैं एक लडकी हूं, लेकिन साथ ही उन्होंने मेरे साथ कोई विशेष तरह का बर्ताव भी महज इसलिए नहीं किया कि मैं एक लडकी थी। मेरे मॉम-डैड ने मुझे एक सुविधापूर्ण लाइफ स्टाइल दी, लेकिन लाड-लडाने को विलासिताओं की बारिश भी मुझ पर नहीं की, यानी सही तरह से मेरी परवरिश हुई। कला, संगीत और नृत्य में मेरी रूचि को प्रोत्साहित किया और साथ ही  मुझे खेलों में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया।

आपको बनने-संवरने का शौक है...।
देखिए, यह तो औरत होने का बहुत बडा फायदा है, और मैं इस फायदे का भरपूर आनंद  लेती हूं। लेकिन मैं उन लोगों में से नहीं हूं, जो आइने के सामने घंटों यह सोचने में बर्बाद कर देते हैं कि आज कौन-सी ड्रेस पहनी जाए। मेरी कोई एक फिक्स्ड स्टाइल या लुक नहीं है। हां, जब मेरा मूड खराब होता है तो बनने-संवरने से वह ठीक हो जाता है।

 जिगर शाह (बीएनएस)
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