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गंदा है पर धंधा है ये
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16 जनवरी 2010, 12:59 hrs IST
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बॉक्स ऑफिस इतना बेरहम शायद कभी नहीं था। दर्शकों की बेरूखी और फिल्मों के लगातार पिटने का सिलसिला कुछ ऎसा आगे बढा कि तमाम छोटे-बडे सितारे अपनी फिल्मों को हॉट बनाने में जुट गए। अमिताभ बच्चन 'पा' को लेकर मीडिया के बीच आए, तो आमिर खान '3 इडियट्स' के लिए हुलिया बदलकर शहर-शहर घूमते रहे। 'रण' के लिए रामगोपाल वर्मा ने दस पेज का अखबार निकाला, जिसका टाइटल रखा- 'रण टाइम्स'। 2008 में रामू ने दावा किया था कि उनकी फिल्म 'फूंक' को कोई भी अकेला नहीं देख सकता और उन्होंने अकेले 'फूंक' देखने वाले दर्शक को इनाम देने का एलान कर दिया, जबकि साल 2009 में 'अज्ञात' के प्रमोशन के लिए रामू ने सिनेमाघरों में खून से सने पुतले टांक दिए। मार्केटिंग का फंडा है भइया, यह जो भी करा दे वह कम है। फिल्मकारों का सीधा-सा तर्क है कि धंधे में टिके रहना है, तो ऎसी गिमिक्स का सहारा लेना ही पडेगा। राकेश रोशन की अनुराग बसु निर्देशित फिल्म 'काइट्स' की रिलीज अभी दूर है, लेकिन फिल्म के नायक ऋतिक रोशन और परदेसी नायिका बारबरा मोरी के बीच अंतरंग दोस्ती के किस्सों को फिल्म की पब्लिसिटी के लिए अभी से इस्तेमाल किया जा रहा है। करण जौहर कैंप की फिल्म 'कुर्बान' की रिलीज के ठीक पहले करीना कपूर और सैफ अली खान के किस सीन को जमकर प्रचारित किया गया, हालांकि इस गिमिक का फायदा फिल्म को नहीं हुआ। 'राज-द मिस्ट्री कंटीन्यूज' की रिलीज के ठीक पहले महेश भट्ट ने फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित करवाई, जिसमें उन्हें सबसे डरावनी तस्वीर भेजनी थी और विजेता को फिल्म के सितारों से मिलने का अवसर मिलना था। 'देव डी' की रिलीज के वक्त अनुराग कश्यप ने एक ऎसी वेबसाइट शुरू की, जिस पर जाकर लोग फिल्म की हीरोइन कल्कि से चटपटी बातें कर सकते थे। दूसरी तरफ, इस फिल्म के हीरो अभय देओल टैटू के जरिए सुर्खियां बटोरने में जुटे थे। पब्लिसिटी की इसी भागमभाग में कभी 'क्या कूल हैं हम' की रिलीज के वक्त आफताब शिवदासानी और रितेश देशमुख का पुणे के एक क्लब में पंगा हो जाता है, तो कभी कश्मीरा शाह 'रेवती' फिल्म में पीठ से नीचे का शरीर दिखाने के लिए निर्माता पर मुकदमा ठोकने की धमकी देती नजर आती हैं। मल्लिका शेरावत ने 'बचके रहना रे बाबा' के प्रचार के लिए फिल्म के टिकट बेचे। उर्मिला मातोंडकर 'नैना' के रिलीज होने से पहले एक टीवी सीरियल में अपने सुपर नेचुरल अनुभव ब्ाांटती हैं। और फिल्म 'गर्दिश' (1993) के प्रमोशन के लिए तो फिल्म के हीरो जैकी श्रॉफ की गिरफ्तारी तक की खबर उडा दी गई। साथ ही यह भी कहा गया कि अनु कपूर को भिखारियों की भीड ने पीट दिया । इन खबरों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं थी। लेकिन यह मजाक जैकी को भारी पड गया। उन दिनों एक माफिया के साथ संबंधों को लेकर पुलिस उनसे पूछताछ कर रही थी। इसलिए जैकी को यह बात साबित करने में कई दिन लग गए कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था। खैर, चाहे जो भी हो इससे उनकी फिल्म को देखने के लिए दर्शकों की भीड उमड पडी। हमारे यहां महेश भट्ट और मुकेश भट्ट जैसे फिल्म निर्माता भी हैं, जो पब्लिसिटी की खातिर किसी की मौत का विज्ञापन छपवाने से भी नहीं हिचकिचाते। 1995 में कुछ अखबारों में अभिनेत्री मनीषा कोइराला की हत्या और हत्यारे के फरार हो जाने की खबर छपी थी। इस सनसनीखेज समाचार के छपने के बाद अखबारों के दफ्तरों में फोन की घंटियां घनघनाने लगीं। बाद में पता चला कि यह एक विज्ञापन था, जिसे निर्देशक महेश भट्ट ने फिल्म 'क्रिमिनल' के प्रचार के लिए छपवाया था। इतना सब कुछ होने के बाद मुकेश भट्ट ने बडे भोलेपन से कहा था, 'यह एक विज्ञापन ही तो है। फिल्म को खबरों में बनाए रखने के लिए सब कुछ करना पडता है।' शायद इसीलिए महेश भट्ट ने गुलशन कुमार की हत्या के आसपास के समय शाहरूख खान की 'डुप्लीकेट' के सैट पर हत्या की खबर उडा दी। गुलशन कुमार की हत्या से भयभीत फिल्म इंडस्ट्री एक और हत्या की खबर से सहम गई थी। यह बात और है कि मनीषा की हत्या का फायदा न तो 'क्रिमिनल' को मिला और न ही यह ड्रामेबाजी 'डुप्लीकेट' को डूबने से बचा सकी। लगता है महेश भट्ट को बैड पब्लिसिटी ही रास आती है। तभी तो मुंबई के एक अंग्रेजी अखबार 'मिड डे' ने यह दावा किया था कि उसके पास अश्मित पटेल और रिया सेन की अंतरंग तस्वीरें हैं। अखबार का यह दावा भट्ट कैंप की उस समय रिलीज होने वाली फिल्म 'नजर' के लिए पब्लिसिटी गिमिक बन गया, जिसमे अश्मित हीरो थे। 2004 में 'मिड डे' ने ही करीना कपूर और शाहिद का एक क्लब में चुंबन लेते हुए फोटो छापा था । हालांकि, शाहिद और करीना दोनों ने उस तस्वीर को बकवास बताया था और करीना ने तो 'मिड डे' पर मानहानि का दावा करने की धमकी तक दे दी थी। वास्तव में यह पब्लिसिटी गिमिक था, क्योंकि उन दिनों शाहिद कपूर की 'ये दिल मांगे मोर' और करीना कपूर की 'बेवफा' रिलीज होने वाली थी। पब्लिसिटी की इस दौड मे फिल्मी सितारे भी बढ-चढकर हिस्सा लेते हैं। हाल ही आमिर खान '3 इडियट्स' के प्रचार के लिए देश के कई शहरों में भेष बदलकर गए। इसके अलावा आमिर ने फिल्म रिलीज होने से ठीक पहले शाहरूख से माफी मांगी। इससे पहले आमिर ने 'गजनी' के प्रमोशन के लिए शहर-शहर घूमकर लोगों के बाल काटे। 'चांदनी चौक टू चाइना' के रिलीज होने से पहले मकर संक्रांति के दिन पतंग उडाने के लिए अक्षय कुमार दिल्ली के चांदनी चौक में पहंुच गए। प्रमोशन के लिहाज से मौजूदा दौर में फैशन शो फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। मधुर भंडारकर की पिछली फिल्म 'जेल' की स्टार कास्ट नील नितिन मुकेश और मनोज वाजपेयी कैदियों वाले कपडे और हाथ में हथकडी पहनकर रैंप पर चले। -राजेंद्रप्रसाद कांडपाल
'कुर्बान' के लिए करीना और सैफ के बीच कुछ हॉट सीन फिल्माए गए और रिलीज के ठीक पहले इनका जमकर प्रचार किया गया। '3 इडियट्स' के प्रचार के लिए आमिर ने वेश बदला और शहर-शहर घूमे। 'रण' के लिए रामगोपाल वर्मा ने दस पेज का टेब्लॉयड निकाला, जिसका टाइटल रखा- 'रण टाइम्स'। तुषार कपूर और प्राची देसाई ने अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए टिकट खिडकी पर भी मोर्चा संभाला। 'जेल' के प्रमोशन के लिए नील मुकेश रैंप पर चले और स्पेशल फोटो शूट में शामिल हुए। रैंप का हादसा 'फैशन' में मधुर भंडारकर ने अपनी फिल्म 'फैशन' के प्रमोशन के लिए साल 2006 के लॅक्मे फैशन वीक की एक घटना को आधार बनाया। रैंप पर मॉडल कैरोल ग्रेसियस के गाउन के अचानक खिसकने के सीन को मधुर ने कंगना पर ज्यों का त्यों फिल्माया। इस सीन को लेकर कंगना भी बहुत उत्साहित थीं और उन्होंने बिना बॉडी डबल की मांग किए पूरा सीन खुद ही किया।
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