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सोमवार, 15 मार्च, 2010
हैरतअंगेज है ये जहां!
24 जनवरी 2010, 12:13 hrs IST
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Raviwariya
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धरती पर कई अजूबे हैं। कुछ इंसान ने बनाए हैं तो कुछ प्रकृति ने। कई जगह तो प्रकृति ने धरा को ऎसी खूबसूरत चादर ओढाई है कि इसका नजारा देखते ही बनता है। धरती के कुछ भू-भाग (लैंडस्केप) ऎसे हैं, जिन्हें देखने पर लगता ही नहीं कि ये धरती के ही हिस्से हैं। चर्चा कुछ ऎसे ही अनोखे हिस्सों की, जो धरती को अलग ही दुनिया की शक्ल देते हैं।

बर्फ और धुएं का संगम (आइसलैंड)
उत्तरी अटलांटिक महासागर पर स्थित यूरोपीय देश आइसलैंड में ऎसे अनोखे भू-भाग हैं, जिन्हें देखकर आप इसे कोई दूसरा ग्रह समझ सकते हैं। यहां की चट्टानों में जहां आपको धुआं और बुलबुले दिखेंगे, वहीं यहां बर्फ भी जमी मिलेगी। ऎसा अद्भुत संगम धरती पर कहीं ओर मुश्किल से देखने को मिलेगा। इस द्वीप पर कोई पेड नहीं है और यहां आबादी बहुत कम है। यहां का जनसंख्या घनत्व केवल 3 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। यहां यूरोप का सबसे बडा ग्लेशियर (हिमनद) वेटनाजोकल भी है।


जहन्नुम का द्वार (उज्बेकिस्तान)
यहां एक ऎसी खास जगह है, जहां विशाल खड्डा है और उसमें हर समय ज्वलनशील गैसें उफनती हैं। स्थानीय लोग इसे 'जहन्नुम का द्वार' कहते हैं। यह जगह इतनी वीरान और शांत है मानो आप शुक्र ग्रह पर पहुंच गए हों। यहां जलती हुई गैसें यह बताने का काम करती हैं कि धरती के उत्पत्ति के वक्त यहां किस तरह का माहौल रहा होगा। मध्य एशिया स्थित इस देश में यह जगह उपग्रह की तस्वीरों में भी किसी अजूबे से कम नजर नहीं आती। यह स्थान उज्बेकिस्तान के दरवाज नामक शहर में है। माना जाता है कि इस विशाल खड्डे में ये गैसें पिछले 35 साल से लगातार जल रही हैं।

सहारा की आंख (मौरिटेनिया)
उत्तरी-पश्चिम अफ्रीकी देश मौरिटेनिया में प्रकृति का एक ऎसा अजूबा मौजूद है, जिसे 'सहारा की आंख' कहा जाता है। यह एक ऎसी विशाल गोलाकार संरचना है, जो 50 किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। यह इतनी बडी है कि इसे अंतरिक्ष से साफ देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों के लिए यह एक गुत्थी जैसी है, क्योंकि वे इसके निर्माण की वजह पर एकमत नहीं हैं। कुछ मानते हैं कि यह किसी उल्कापिंड की टक्कर का नतीजा है तो कुछ इसे चट्टानों के क्षरण के कारण निर्मित मानते हैं। कुछ इसे धरती के सम्मिलित उठाव का नतीजा मानते हैं तो कुछ के लिए ये तीनों वजहों का सम्मिलित परिणाम भी है।

धरती पर एलियन स्पेस (सोकोट्रा आयरलैंड)
अगर धरती पर कहीं दूसरे ग्रह जैसी दिखने वाली जगह ढूंढी जा सकती है, तो वह है सोकोट्रा आयरलैंड। सोमालिया से 250 किलोमीटर और यमन से 340 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह द्वीप हिंद महासागर में स्थित है। यह पूरी तरह निर्जन है और यहां की भौगोलिक परिस्थितियां किसी भी ग्राफिक डिजाइनर को नई डिजाइंस की प्रेरणा देने का काम कर सकती हैं। यहां के पेड-पौधे अजीबोगरीब आकार के हैं, जिन्हें देखने वाला दांतों तले अंगुली दबाए बगैर नहीं रहता। इसका कुल क्षेत्रफल 3796 किलोमीटर है और माना जाता है कि यह लाखों साल पहले अफ्रीकी भू-भाग का हिस्सा रहा था।

कुदरत की ऑयल पेंटिंग (एंटेलोप घाटी, एरिजोना)
उत्तरी अमरीका की यह खास जगह चट्टानों की घाटी होने के बावजूद कुदरत की ऑयल पेंटिंग सी नजर आती है। लगता है कि कुदरत ने तसल्ली से धरती के कैनवास पर यह चित्रकारी की है। यही वजह है कि इस स्थान पर सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं और इसे सबसे ज्यादा फोटोग्राफ खींचने लायक जगह भी कहा जाता है। इन चट्टानों के बीच आने वाली बाढ भी लोगों के बीच कौतुहल का विषय है। पिछली बार यहां 30 अक्टूबर, 2006 को बाढ आई थी, जो 36 घंटे तक चली। इसके बाद प्रशासन को इस घाटी के एक खास हिस्से को पांच महीने तक बंद रखना पडा था।

सोने की नदी (रियो टिंटो, स्पेन)
स्पेन की रियो टिंटो नदी को दुनिया की सबसे अम्लीय नदी माना जाता है। इसका रंग लाल है और पीएच स्केल पर इसका अम्लीय माप 2 है। प्राचीन काल से इस नदी के पास से सोने, चांदी और तांबे के खनन का काम किया जा रहा है और इसके अम्लीय होने की वजह भी यही है। कहा जाता है कि जितनी धातुएं इस नदी के किनारे पर मौजूद हैं, उतनी दुनिया में किसी और नदी के पास नहीं मिलती। भले ही इसका पानी इंसान के लिए घातक हो, लेकिन अद्भुत नजारे देखने वाले लोगों के लिए यह जगह दिलचस्प और कौतुहलवर्घक है।

पीली चट्टानों का बगीचा
(यलोस्टोन नेशनल पार्क, अमरीका)
अमरीका के व्योमिंग प्रांत में सरकार ने 1872 में एक खास जगह को यलोस्टोन नेशनल पार्क का नाम दिया था। इसकी खूबी यह है कि यहां गर्म पानी की धाराएं निकलती हैं और साथ ही यहां गर्म पानी, लाइमस्टोन और चट्टानों के टूटने की वजह से अद्भुत नजारा दिखाई देता है। यह कुदरत की जीती-जागती कलाकृति है, जो चट्टानों के क्षरण और बहते पानी की वजह से हर पल नया आकार लेती जाती है। सबसे बडी विशेषता है यहां के पेड। इस तरह की परिस्थिति में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि यहां पेड जिंदा भी रह सकते हैं। यहां न केवल काफी संख्या में पेड-पौधे हैं, बल्कि वे पूरी तरह सामान्य आकार के हैं।

आशीष खंडेलवाल

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