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सोमवार, 15 मार्च, 2010
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08 फरवरी 2010, 10:23 hrs IST
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पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता शुरू  करने के भारत के निर्णय को एक साहसिक कदम के रू प में देखा जाना चाहिए। इसकी वजह यह है कि यह निर्णय ऎसे समय किया गया है, जब भारत और अमरीका की कई खुफिया एजेंसियों ने देश में कभी भी आतंककारी हमलों की चेतावनी दे रखी है। इतना ही नहीं, इसी समय जमात-उद-दावा ने कश्मीर में जेहाद जारी रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों को व्यवस्थित करने के लिए पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में 'कश्मीर एकजुटता दिवस' पर अतिवादी दलों का सम्मेलन आयोजित किया और भारत से निपटने का आह्वान किया।

पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल कियानी के बयान से भी हालात की गम्भीरता पता चलती है,जिसमें उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान की सेना भारत केन्द्रित है, क्योंकि भारत का पाकिस्तान के साथ टकराव का इतिहास रहा है।  उल्लेखनीय है कि लश्कर-ए-तैयबा द्वारा मुम्बई पर किए गए 26/11 के हमले के बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक समग्र वार्ता में ठहराव आ गया। इससे विभिन्न मुद्दों पर वार्ता बाधित हुई और द्विपक्षीय संबंध सामान्य करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को धक्का लगा। शांति वार्ता जारी नहीं रही, लेकिन दोनों सरकारों के बीच सामान्य सरकारी कार्य जारी रहे। आतंककारी संगठनों को विध्वंस करने की कोई इच्छा न होने और शांति की ओर सकारात्मक ढंग से बढने के किसी तरह के प्रयासों से दूरी के बावजूद पाकिस्तान भी चाहता है कि औपचारिक समग्र वार्ता  शुरू  हो। इस तरह की मांग पाकिस्तान के कुछ नेता कर चुके हैं और अमरीका ने भी इस आशय के संकेत दिए, लेकिन भारत सरकार ने वार्ता को पुन: शुरू  करने में कोई रूचि नहीं दिखाई। लेकिन अब भारत राजनीतिक और आधिकारिक स्तर पर वार्ता शुरू  कर रहा है।

अनेक आशंकाओं की परवाह किए बिना भारत ने वार्ता को फिर शुरू  करने का पहला संकेत यह निर्णय लेकर दिया कि सार्क देशों के गृह मंत्रियों के सम्मेलन में गृहमंत्री पी. चिदम्बरम भाग लेंगे। यह सम्मेलन मार्च-अप्रेल में इस्लामाबाद में होगा। चिदम्बरम पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक से द्विपक्षीय सम्बन्धों पर भी विचार-विमर्श करेंगे।

भारत की विदेश सचिव निरूपमा राव की ओर से पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर को दिल्ली आने का आमंत्रण भेजा गया है, ताकि दोनों देश सुविधानुसार तारीख तय कर सकें और आतंक समेत विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की जा सके। पाकिस्तान ने प्रस्तावित वार्ता का स्वागत किया है और वह चाहता है कि समग्र वार्ता शुरू  हो। भारत ने कहा है कि वह समग्र वार्ता की बहाली के लिए अभी तैयार नहीं है, लेकिन दोनों देशों के समान हित वाले मुद्दों पर विचार- विमर्श करने के लिए वह हमेशा तैयार है।

चिदम्बरम की इस्लामाबाद यात्रा से पहले विदेश सचिव स्तरीय बातचीत होगी, ताकि दोनों देशों के गृहमंत्रियों की मुलाकात के पहले समग्र वार्ता का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। पाकिस्तान का पूरा आग्रह समग्र वार्ता की बहाली का लगता है, लेकिन वह सचिव स्तरीय वार्ताओं के लिए तैयार है। पाकिस्तान के उच्चायुक्त भारत की विदेश सचिव निरूपमा राव से विचार-विमर्श कर चुके हैं।

दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच प्रस्तावित बातचीत का एजेंडा बहुत कुछ आतंक के मुद्दे पर पाकिस्तान के रूख को लेकर रहेगा। हमारी प्राथमिकता आतंककारी संगठनों को विध्वंस करने के मुद्दे पर केन्द्रित होनी चाहिए। ये संगठन खुले रू प से भारत पर लक्ष्य साधने का अपना इरादा जाहिर कर चुके हैं। इसके अलावा अफगानिस्तान और बांग्लादेश के हमारे राजनयिक मिशनों को पाकिस्तान में आधार बनाए आतंककारियों की ओर से सुरक्षा का खतरा जारी है। इस बात पर भी विचार-विमर्श होना चाहिए कि पाकिस्तान इन्हें नेस्तनाबूद करने के लिए क्या कार्रवाई करता है अन्य प्रमुख मुद्दों में अफगानिस्तान पर भी चर्चा होनी चाहिए। पाकिस्तान लगातार भारत को अफगानिस्तान से एक तरफ करने का प्रयास करता रहा है। वार्ता में इस मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए। क्षेत्र के घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए समग्र वार्ता के नए प्रारूप की आवश्यकता है।

पाकिस्तान लम्बे समय से कहता आ रहा है कि समग्र वार्ता शुरू  की जाए, लेकिन अब उसे खुले मन से बातचीत के लिए आगे आना होगा। साथ ही अपनी धरती से आतंककारी हमलों को रोकने के प्रयास भी करने होंगे। हालांकि अब भी पाकिस्तान आतंककारी संगठनों को खुले आम अपनी गतिविधियां चलाने से नहीं रोक रहा। जेहादी संगठनों के खतरनाक इरादों को पाकिस्तान नजरअंदाज कर रहा है और इस ओर से आंखें बंद कर ली है।

मीडिया की खबरों के अनुसार 'कश्मीर एकजुटता दिवस' पर नजरिया ए पाकिस्तान ट्रस्ट के चेयरमैन माजिद निजामी ने स्पष्ट कहा कि जेहाद के बिना कश्मीर को आजाद नहीं कराया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी जुल्फिकार अली भुट्टो के सच्चे उत्तराधिकारी हैं, तो उन्हें भुट्टो के पद चिन्हों पर चलना चाहिए। भुट्टो ने कश्मीर की आजादी के लिए भारत से हजारों वर्ष तक युद्ध करने की बात कही थी। निजामी ने पाकिस्तानी सेना को कहा कि वह भारत पर हमले के लिए अपनी तोपें, मिसाइलें और परमाणु बम तैयार रखे, क्योंकि हमें कश्मीर को आजाद कराने के लिए जेहाद छेडना है।

सम्मेलन के अन्त में आईएसआई के पूर्व मुखिया जनरल हमीद गुल (रिटायर्ड) ने स्पष्ट कहा कि भारत से कश्मीर को आजाद कराने के लिए जेहाद छेड दिया जाना चाहिए। कांफ्रेंस के अन्त में घोषणा पत्र में आतंककारी गुटों के आधार शिविरों को क्षेत्रीय स्तर का दर्जा देने और कश्मीर में जेहादी दलों पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग की गई। इन मांगों पर पाकिस्तान के रूख का पता नहीं चल सका है, लेकिन इतना तो तय है कि इस तरह की कांफ्रेंस के आयोजन की खुली अनुमति देना इस बात के संकेत हैं कि इन संगठनों को पाक अधिकृत कश्मीर में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर शिविर स्थापित करने की अनुमति दी जा सकती है।

अफसर करीम
[लेखक भारतीय सुरक्षा सलाहकार परिषद के सदस्य रहे हैं]
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