hindi news

 
सोमवार, 15 मार्च, 2010
अकेले निर्विवाद 'नेताजी'
23 जनवरी 2010, 11:43 hrs IST
ईमेल | प्रिंट | कमेंट | टेक्सट  min  max | Bookmark and Share
Left
Editorial
Left
जब तक हमारा देश है, तब तक वे याद किए जाएंगे। नेताजी सुभाषचंद्र बोस का योगदान भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने देश की आजादी के लिए जिस स्तर का संघर्ष किया, वैसा कोई दूसरा उदाहरण विश्व इतिहास में नहीं मिलता है लेकिन वे अपने पीछे एक बडा अनसुलझा सवाल छोड गए हैं उनका निधन कब, कहां कैसे हुआ कौन जानता है उनका पूरा सच ऎसे ही सवालों के साथ पेश है इस बार का तेवर-
सुभाषचंद्र बोस जयंती
बोस की अनदेखी
देवब्रत बिस्वास
महासचिव, फॉरवर्ड ब्लाक
आजादी के बाद बोस के साथ किसी सरकार ने न्याय नहीं किया। यदि बोस के दर्शन के आधार पर भारत निर्माण होता तो देश की तस्वीर दूसरी होती। फॉरवर्ड ब्लाक वर्षो से बोस के जन्म दिवस को देशप्रेम दिवस के रूप में मनाने की मांग कर रहा है, लेकिन किसी सरकार ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। यह उनकी उपेक्षा नहीं तो और क्या है
असल में भारत सरकार उसे उजागर नहीं होने देना चाहती। मुखर्जी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में विमान हादसा नहीं होने की बात कही है। इस पर बहस कराने के बजाय सरकार ने एटीआर लाकर उसे बंद कर दिया। दाल में कुछ काला है, सरकार इस रहस्य को नहीं खुलने देना चाहती।
अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटिश सरकार ने द्वितीय विश्व युद्ध की जिन फाइलों को वर्गीकृत करने का काम किया, उसमें बोस की फाइल को शामिल नहीं किया गया। सन् 2020 तक बोस की फाइल को दबाकर रखने का फैसला उसकी कार्यपद्धति को संदिग्ध करते हैं।
उनका सबसे बडा योगदान तो अग्रेजों से बराबरी के मुकाबले के लिए सैनिक कमान की स्थापना करने का है। इसके अलावा बोस ने आजाद हिंद फौज के माध्यम से लोगों को एकजुट करने का काम किया।
नए भारत का बोस ने जो रोल मॉडल तैयार किया था, उसमें हर हाथ को काम, हर पेट को रोटी कैसे उपलब्ध हो, इसका अपूर्व फार्मूला दिया गया था। अंडमान द्वीप को शहीद स्वराज द्वीप बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। इस मांग को मंजूर करना चाहिए।
प्रस्तुति - राकेश शुक्ला

सदा होगा सम्मान
प्रवीण डावर
राष्ट्रीय सचिव, कांग्रेस
ऎसा नहीं है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ सरकार ने पूरा न्याय किया। नेताजी का जन्म दिन पूरे धूमधाम से मनाया जाता है। कांग्रेस तो अपने 125वें वर्ष में नेताजी पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगी। आजादी के लिए उनके योगदान को देश नहीं भूल सकता।
उनके सच को हमेशा सामने लाया गया। सरकार की तरफ से जितनी बार जांच बिठाई गई, यही बात सामने आई कि उनकी मौत हवाई दुर्घटना में हुई। इसके बाद बेवजह उनकी मौत को लेकर राजनीति की जाती है।
मैं कह चुका हूं कि सरकार ने हमेशा जांच करा सच्चाई सामने लाने की कोशिश की। हर बार एक ही बात सामने आई कि हवाई दुर्घटना में मौत हुई, फिर इसमें ब्रिटिश हुकूमत से समझौते वाली बात कहां से आ गई।
देश की आजादी की लडाई में उनके योगदान को कौन भूल सकता है। आज की नई पीढी भी उनकी तरह बनने का सपना देखती है। नेहरू के साथ मिलकर समाजवाद का रास्ता उन्होंने ही दिखाया। साथ ही धर्मनिरपेक्षता के प्रति उनकी सोच आज देश की जरूरत है।
जैसा कि मैं पहले कह चुका हूं कि समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता का रास्ता उन्होंने दिखाया। उसकी सीख लेना चाहिए। इसके साथ जब वे 1938 में कांग्रेस के अध्यक्ष थे तो उन्हाेंने एक नेशनल प्लानिंग कमेटी का गठन कर देश को आर्थिक नीति दी थी, जिस पर आज तक अमल किया जाता है। उनकी ही नीति थी कि गरीबों के उत्थान के लिए अधिक से अधिक काम होना चाहिए। उनके सिद्धांतों और चरित्र को याद कर उससे प्रेरणा लेना चाहिए। उनकी देशभक्ति अविस्मरणीय है।
प्रस्तुति - अजीत मैंदोला

More Stories
editorial news नया आरक्षण नई चिंताएं
editorial news अच्छी पहल पर हंगामा
editorial news नीतिगत छलावा
editorial news आर्थिक मजबूती पर जोर
editorial news काबुल हमले के निहितार्थ
editorial news वो आगे आ रही हैं
editorial news दूर देश के हुए हुसैन!
editorial news राष्ट्र की रक्षा पर ध्यान कम
editorial news हम न आएंगे दुबारा
editorial news विरोध दिखाता विपक्ष
editorial news मंदी गई, गरीबी कायम
editorial news महंगाई से लडे बजट
editorial news क्षमता पर प्रश्न
editorial news ज्यादा बजट मांगती सुरक्षा
editorial news खूब दिखावा, बहुत दहेज
Most Read Stories
News Headlinesदूर देश के हुए हुसैन!
News Headlinesमंदी गई, गरीबी कायम
News Headlinesखूब दिखावा, बहुत दहेज
News Headlinesहम न आएंगे दुबारा
News Headlinesक्षमता पर प्रश्न