Friday, 01 Mar 2013 9:28:21 hrs IST
मुझे यह बजट ठीक लगा है। माना जा रहा था कि यह चुनाव पूर्व बजट है, इसलिए इसे लोकलुभावन बनाने के प्रयास होंगे, लेकिन ऎसा कुछ नहीं हुआ। अभी की जो परिस्थितियां हैं, उस लिहाज से यह बजट संतुलित है। जहां तक योजनाओं का सवाल है मुझे लगता है कि बजट में तीन वर्गो पर काफी फोकस किया है, इसमें महिलाएं, युवक और गरीब शामिल हैं। महिलाओं और युवकों के लिए, तो इसमें काफी कुछ है, लेकिन गरीबों के लिए सीधे तौर पर कुछ नहीं किया गया है। पहले जो था, वही यथावत है।
युवकों के लिए जो दक्षता विकास की योजना बनाई है, वह बहुत जरूरी थी। यह अच्छी योजना है। महिलाओ के लिए भी काफी कुछ किया गया है। बजट में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ ज्यादा करना चाहिए था। हालांकि संयंत्र और मशीनरी में 100 करोड़ या उससे अघिक निवेश करने वाले निवेशकों को 15 प्रतिशत निवेश भत्ते का हकदार बनाया गया है, लेकिन निवेश की इस सीमा को कम करना चाहिए था, जिससे निवेश को प्रोत्साहन मिलता। अभी 'इन्वेस्टमेंट क्राइसिस' है।
निवेश की कमी है, जिसे बढ़ाने की सख्त जरूरत है। अब सवाल यह है कि इन योजनाऔं के लिए पैसा कहां से आएगा। वास्तव में यह परेशान कर देने वाला सवाल है, क्योंकि सरकार ने कुल टैक्स तो 18 हजार करोड़ रूपए के करीब बढ़ाए हैं और इसकी तुलना में योजनाएं बहुत कर दी हैं।
इसका समाधान बस यही है कि या तो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) ज्यादा आए या फिर विनियोजन बढ़े। इन योजनाओं के लिए पैसा जुटाने की बजट में कोई योजना नजर नहीं आती। लगता है कि राजस्व के अनुमान के आधार पर योजनाएं बना दी गई हैं। कहीं पिछली बार की तरह न हो जाए। गौरतलब है कि पिछले बजट में अनुमान लगाया गया था कि स्पेक्ट्रम से 14 हजार करोड़ रूपए मिल जाएंगे, जबकि मिले सिर्फ 1900 करोड़।
मुझे इस बजट में सबसे अच्छी बात युवकों के लिए शुरू किए गए दक्षता विकास वाली लगी। वह बहुत जरूरी था। हम डेमोक्रेटिक डिवीडेंड की बात करते हैं और यह डेमोक्रेटिक डिवीडेंड तभी होगा, जब दक्षता होगी।
दूसरा, आधारभूत ढांचे पर काफी जोर दिया है। पहले के बजट में भी जोर दिया गया था और इस बार भी जोर दिया गया है, तो यह भी एक अच्छी चीज है। महिलाओं के लिए भी काफी कुछ किया है। मुझे लगता है कि आधारभूत ढांचे की अभी काफी कमी है इसलिए इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। तीसरा, इन्होंने खाद्य सुरक्षा विधेयक के लिए दस हजार करोड़ रूपए रखे हैं। अगर यह योजना अगले साल जनवरी, फरवरी-2014 में शुरू हुई, तब तो इस बजट से काम चल जाएगा।
अगर इसी सत्र में संसद में खाद्य सुरक्षा बिल आ जाएगा, तो उसके लिए कम से कम बीस हजार करोड़ रूपए की जरूरत होगी। अगर इस योजना के क्रियान्वयन में समय लगा, तो इन पैसों से काम चल जाएगा, अगर यह योजना अभी शुरू करनी पड़ी, तो पैसों की समस्या तो रहेगी ही।
प्रो. विजय शंकर व्यास
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य व राज्य आयोजना बोर्ड के उपाध्यक्ष
नए उद्यमियों को निराशा
नए उद्यमियों की कुछ बड़ी समस्याएं होती हैं। नए उद्यमियों को नकदी की समस्या होती है। नए उद्यमी को यह उम्मीद रहती है कि उसके लाभ पर टैक्स नहीं लगे। अभी शुरूआत कर रही कंपनी और पुरानी-बड़ी कंपनी से बराबर टैक्स लिया जाता है। उम्मीद थी, नए उद्यमों के लाभ को तीन साल तक के लिए टैक्स फ्री किया जाएगा, लेकिन ऎसा नहीं हो सका। सरकार चाहती तो युवा या नए उद्यमियों के लिए हब या पार्क बना सकती थी, एसईजेड बना सकती थी। सरकार ऎसे उपाय कर सकती थी कि नए उद्यमी देश के बीमारू राज्यों में उद्यम लगाने के लिए प्रोत्साहित हों, लेकिन सरकार ने इस पक्ष की उपेक्षा कर दी है। नई कंपनियों मे कॅरियर शुरू करने वाले युवा पेशेवरों को टैक्स में रियायत देने के लिए सरकार कुछ कर सकती थी। आज नए उद्यमों की ओर श्रम या मैन पावर को आकर्षित करना जरूरी है।
जेएनएनयूआरएम जैसी स्कीम की गांवों में जरूरत थी। बीमारू राज्यों में ग्रामीण क्षेत्र ज्यादा होते हैं, जैसे बिहार, राजस्थान इत्यादि राज्यों का अच्छी सड़कों के अभाव में तेजी से विकास नहीं होता है। पिछड़े राज्यों के गांवों में परिवहन सुविधा बढ़ाने की जरूरत है। चेन्नई-बेंगलूरू इंडस्ट्रियल कोरिडोर की बात हुई, मुंबई-दिल्ली कोरिडोर का प्रावधान पहले से है। ऎसा औद्योगिक कोरिडोर पूर्वी भारत में नई दिल्ली-कोलकाता के बीच जरूरी है, क्योकि इस क्षेत्र में देश की 35 फीसद से ज्यादा आबादी रहती है।
जो राज्य पिछड़ेपन के आधार पर विशेष राज्य दर्जा की मांग कर रहे हैं, उन्हें लाभ के संकेत हैं। बीआरजीएफ के तहत पिछड़े राज्यों के लिए विशेष फंड दिया गया है। 11,500 करोड़ रूपये आवंटित हुए हैं। इससे भी बड़ी बात है सरकार, बैकवर्ड स्टेट चयन का तरीका बदलेगी। प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से जो बैकवर्ड होगा, वह राज्य बैकवर्ड कहलाएगा।
किसानों के लिए अच्छी बात है कि वे अब मिलकर कंपनी बना सकते हैं, किसान अगर मिलकर कंपनी में 5 लाख रूपए लगाएंगे, तो सरकार भी 5 लाख रूपए देगी। सरकार ने 10 लाख रूपए तक देने की व्यवस्था की है, इसके लिए 23 करोड़ का फंड बनाया गया है। फूड सिक्योरिटी की बात हुई है। सरकार न्यूट्रीशन (पोषक आहार) सब्सिडी लेकर आ रही है। अभी अगर आपका पेट भरा हुआ है, तो आप सुखी आदमी समझे जाते हैं, लेकिन अब सरकार समग्र विकास व प्रोटीन पर ध्यान दे रही है। इसके लिए सरकार ने 200 करोड़ रूपए की स्पेशल स्कीम की शुरूआत की है।
छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल इत्यादि कुछ राज्यों में नई हरित क्रांति की बात हो रही है, लेकिन इसके लिए आवंटित धन 500 करोड़ रूपए ऊंट के मुंह में जीरा बराबर है। जिन राज्यों के पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक है, वहां सरकार जल सफाई प्लांट लगाने जा रही है, इसके लिए 1400 करोड़ रूपए आवंटित हुए हैं। महिलाओं की उद्यमिता बढ़ रही है, उनके लिए विशेष बैंक से उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी, जिसका असर आने वाले वर्षो में दिखेगा।
कौसलेन्द्र कुमार जाने-माने युवा उद्यमी व आईआईएम-अहमदाबाद के टॉपर







