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....यही दुआ है मेरी
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06 फरवरी 2010, 12:40 hrs IST
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अपरा मेहता की जिंदगी में धारावाहिक 'क्योंकि... सास भी कभी बहू थी' एक यादगार मोड की तरह आया। इसमें अपरा के किरदार को मिली कामयाबी की चमक उनके कॅरियर में आज भी देखी जा सकती है। लेकिन 'क्योंकि...' के बाद अपरा छोटे परदे से करीब-करीब गायब हो गईं। एक लंबे गैप के बाद इन दिनों वे सब टीवी पर दिखाए जा रहे सीरियल 'सजन रे झूठ मत बोलो' में नजर आ रही हैं। बीते दिनों की खुशनुमा यादों में खोई अपरा से हाल ही बातचीत हुई। 'क्योंकि...' के बाद आप लंबे समय तक टेलीविजन से दूर रहीं... दरअसल मैं सीरियल के साथ थिएटर भी करती रहती हूं, इसलिए पिछले अर्से थिएटर में बिजी रही। मेरे एक प्ले के लगातार शो होने के कारण इस दौरान कोई सीरियल नहीं कर सकी। 'सजन रे झूठ मत बोलो' करने की कोई खास वजह असल में इस सीरियल के डायरेक्टर विपुल शाह ने जुलाई में ही कह दिया था कि कोई और काम हाथ में मत लेना, जल्द ही हम एक सीरियल बनाएंगे। फिर यह कॉमेडी सीरियल है और सब टीवी पर आ रहा है, जो कॉमेडी सीरियल के लिए अपनी अलग पहचान रखता है। इस सीरियल में आप एक मां का किरदार निभा रही हैं। यह आपके निभाए दूसरे किरदारों से कितना अलग है बहुत अलग है। इसमें मेरे कैरेक्टर का नाम दामिनी देवी दीवान है। दामिनी ने गुजराती फिल्मों और थिएटर में बरसों काम करके काफी शोहरत पाई। लेकिन हालात कुछ इस तरह बदलते हैं कि वह एक ओल्डएज होम में रहने को मजबूर हो जाती है। हताशा और अपने पुराने सुनहरे दिनों को याद कर वह रोती है और शराब पीती रहती है। वह फिर से थिएटर शुरू करना चाहती है, लेकिन उसके पास पैसे नहीं है। ऎसे में एक दिन उसे अपूर्व शाह मिलता है, जिसे एक लडकी से शादी करने के लिए अपना नकली परिवार बनाना है। पैसों की खातिर दामिनी अपूर्व की मां बनने का नाटक करती है। इस तरह मेरे लिए यह बहुत इंटरेस्टिंग और चैलेंजिंग कैरेक्टर रहा है। 'क्योंकि ...' के बाद इस सीरियल से आपको कितनी उम्मीद है 'क्योंकि...' तो एक लाजवाब सीरियल था, पर 'सजन रे....' से भी मुझे काफी उम्मीदें हैं। मैं दुआ करती हूं कि यह सीरियल भी काफी लंबा चले और दर्शक इसे पसंद करें। पर 'क्योंकि..... जैसा बडा सीरियल तो शायद अब मेरी जिंदगी में आ ही नहीं सकता। लेकिन यही बात आपने 'एक महल हो सपनों का' के समय भी कही थी। हां......तब मैं नहीं सोच सकती थी कि इससे बडा सीरियल भी बन सकता है और मैं उसमें काम कर सकती हूं, पर 'क्योंकि...' उससे भी आगे निकल गया। -संगीता सरदाना
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