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जो जीता, वही सिकदर
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30 जनवरी 2010, 12:21 hrs IST
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अपने इशारों पर सितारों को नचाने वाले कोरियोग्राफर अक्सर गुमनामी के अंधेरे में रहते हैं। लेकिन जी टीवी का रियलिटी शो 'डांस इंडिया डांस' डांस के फील्ड में करियर बनाने की तमन्ना रखने वालों के साथ ही कोरियोग्राफर रेमो डी'सूजा, टैरेंस लेविस और गीता कपूर के लिए भी एक अहम मंच साबित हुआ है। 'डांस इंडिया डांस' के साथ गीता के अब तक के सफर की कहानी, उन्हीं की जुबानी। इन दिनों कई लोगों ने मुझसे पूछा कि 'डांस इंडिया डांस' के दूसरे सीजन में नया क्या होगा, तो मैं उनसे मजाक में कहती, 'मैं कम रोऊंगी। ' पहले मैं बहुत ही कठोर दिल थी। लोगों की समस्याएं मेरे दिल को छूती तक नहीं थीं। बस, मुझे अपने काम से मतलब हुआ करता था। लेकिन इस शो में आने के बाद मुझे एहसास हुआ कि लोग अपनी भावनाओं को लेकर इतने सच्चे और संवेदनशील हो सकते हैं। उनकी इसी सच्चाई को देखकर रोना आ जाता है। मेरी मां ने कहा, 'तुम पहले तो ऎसी नहीं थी।' पर मैंने सोच लिया है, इस साल नहीं रोऊंगी। हमने इस बार कंपीटिशन का लेवल पहले से ऊंचा रखा है। इसके अलावा इस बार कंटेस्टेंट भी मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह तैयार होकर आए हैं। कोरियोग्राफर संदीप सोपारकर ने उनके साथ एक वर्कशॉप रखी थी। मुझे नहीं मालूम कि 'डांस इंडिया डांस' से कंटेस्टेंट को कितना फायदा होता है, लेकिन इतना दावे के साथ कह सकती हूं कि यह शो कॅरियर का विकल्प जरूर है। आज आपको अपनी जगह खुद बनानी होती है। अगर आप औरों से बेहतर हैं, तो दूसरों की जगह ले सकते हैं। और यहां श्रेष्ठ हैं, तो बाहर जाकर अपना स्थान बना सकते हैं। कोरियोग्राफर की हैसियत से हम इस बात पर जोर देते हैं कि सभी प्रतिभागी अपने दिल से डांस करें, क्योंकि जब आप किसी काम को एंज्वॉय नहीं करते हैं, तो काम में खूबसूरती भी नहीं आ पाती। पहले सीजन में रेमो डी'सूजा और टैरेंस लेविस के साथ मिल-जुलकर फैसले किए थे। कभी आपस से लडने या शो बीच में छोडकर जाने की नौबत नहीं आई। हम एक ही प्रोफशन में हैं और जब भी बाहर मिलते हैं, दोस्तों की तरह मिलते हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि यह हमारे प्रोफेशन का एक हिस्सा है। हम सब अपनी-अपनी जगह अच्छे हैं, क्योंकि हमने सीखा है, विशेषता हासिल की है। इस शो का हिस्सा बनने के बाद मुझे नई पहचान मिल गई है। अब लोगों की यह डिमांड रहती है, 'आपने जो 'डांस इंडिया डांस' में किया, हमको वो करना है'। फिलहाल 'डांस इंडिया डांस' मेरी प्राथमिकता है और किसी के लिए भी उत्साहित नहीं हूं। अपने प्रतिभागियों के साथ रहना अच्छा लगता है। लेकिन अगर फिल्म और इवेंट्स में से किसी एक को चुनना हो, तो क्रिएटिविटी के लिहाज से मुझे फिल्मों की बजाय इवेंट्स से ज्यादा संतुष्टि मिलती है। फिल्म में कई सीमाएं हैं, कभी एक्टर के कारण, तो कभी स्टोरी लाइन और निर्माता आदि की वजह से। (बीएनएस)
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