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मंगलवार, 09 फरवरी, 2010
ऊटपटांग सपने
18 अगस्त 2009, 11:09 hrs IST
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कोई स्वाइन फ्लू से परेशान है, किसी को एड्स का डर है, किसी के डायबिटीज है, कोई वायरल से ग्रस्त है, लेकिन हम सपनों से परेशान हैं। ऎसे-ऎसे सपने आते हैं कि पूछो मत। अब तो हमें सपनों से डर लगने लगा है। हालांकि कलाम साहब जैसे पहुंचे हुए विद्वानों ने कहा है कि जिन्दगी में आगे बढना है तो सपने देखो। हमने भी यही सोच कर सपने देखने शुरू  किए। ऎसा नहीं कि हमने सपने देखना अभी शुरू  किया है। हमें तो बचपन से ही सपने आते थे। हमारे सपनों में तोता, कुत्ता, हाथी, बंदर आते तो जवानी में रेखा, हेमा, वहीदा और बबीता ने आना शुरू  कर दिया। आजकल जो सपने आ रहे हैं, वे बडे ही अजीबोगरीब हैं। अजीबोगरीब ही नहीं ऊटपटांग भी हैं।

चलिए कुछ सपने हम आपको सुनाते हैं। एक सपना हमें कुछ महीने पहले आया था। सपने का स्टार्ट ही बडा जोरदार था। हमने एक मोटी सी किताब देखी। उस किताब को तैयार करने में सैकडों लोग जुटे थे। जब किताब तैयार हो गई तो लोगों ने हमें पकड कर उस किताब पर बिठा दिया। हमें लगा जैसे हमें किसी लक्जरी कार में बिठा कर सीट बेल्ट बांध दी हो। अचानक वह किताब रेल की तरह चलने लगी और देखते-देखते हम छोटे से बडे हो गए। अचानक उस किताब को ब्ा्रेक लगा और कुछ मोटे-मोटे लोगों ने हमें पकड कर किताब से नीचे फेंक दिया। अब किताब एक पहाड बन गई। हम फिसलते हुए ऊपर से नीचे आ रहे थे। हम नीचे एक गड्ढे में आ गिरे, जिसमें कीचड जैसा कुछ भरा था। इससे पहले कि हम अल्लाह को प्यारे होते हमारी आंख खुल गई। हम पसीने-पसीने हो गए थे। देखा श्रीमती सामने खडी कह रही थी क्योंजी नींद में संविधान-संविधान क्या बडबडा रहे थे। अब बताइए यह भी ससुर कोई सपना हुआ। अब इस सपने का फल किसे पूछने जाएं। सपने बांचने वालों को यह सपना सुनाएं तो वह हंसने के अलावा कुछ नहीं कर सकता।

 कुछ दिन पहले एक और सपना आया। देखा कि सर पर पगडी बांधे एक बुजुर्गवार ने हमारा हाथ पकडा और  एक गुफा के सामने ले जाकर खडा कर दिया। अचानक उसने जेब से अलादीन का चिराग निकाला। उसे रगडा और जोर से चिल्लाया-खुल जा सिमसिम। हमने देखा कि गुफा का दरवाजा खुल गया। हम आंख फाडकर देख ही रहे थे कि उस बुजुर्गवार ने हमारे जोरदार लात लगाई और हम गुफा में भीतर जाकर गिरे। गुफा क्या थी पूछो मत। चारों तरफ नोट ही नोट थे। हमने पागलों की तरह नोट उठा कर अपनी जेब में भरना शुरू  किया। जैसे ही दौड कर हम खजाने से बाहर आए तो एक सफेद आदमी ने हमें पकड लिया और जेब से सारा धन निकाल लिया। हमने पूछा कि यह क्या कर रहो हो। उसने कहा टैक्स ले रहा हूं। जब हमारी जेब खाली हो गई तो हाथ में एक नोट पकडा कर कहा- ले जा। भूंगडे खा लेना। एक झटके में हमारी आंख खुल गई और हमने देखा कि हम खाट के नीचे पडे हैं। अब आप ही कहें। इन सपनों का हम क्या करें आजकल हमें ऎसे ही ऊटपटांग सपने आते हैं। क्या यह सपने आते ही रहेंगे या फिर कभी बन्द भी होंगे।
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