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कूडा सर्वे
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01 फरवरी 2010, 10:52 hrs IST
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नहीं मानते। ऎसे सर्वे को उठा कर हम कचरेदान में फेंकते हैं। यह सर्वे झूठा है और हमारे महान् निवासियों के प्रति असम्मान दर्शाने वाला है। हम इस सर्वे को क्यों मानें लोभ, लालच, अहंकार, पेटूपन, आलस, क्रोध और ईष्र्या में हम इतने पिछडे हुए हैं। जी हां, हम बीबीसी की मैग्जीन 'फोकस' द्वारा कराए गए उस सर्वे की बात कर रहे हैं जिसमें आस्ट्रेलिया को सबसे बुरे देशों में शीर्ष स्थान पर रखा गया है। इसके बाद अमरीका, कनाडा, फिनलैंड, çब्ा्रटेन का नम्बर आता है। अमरीका वाले सबसे लालची सिद्ध हुए हैं। आइसलैंड वाले सबसे आलसी आंके गए हैं।
मैक्सिकन लोभी हैं तो दक्षिण कोरियाई वासना के मारे हैं। हैरत की बात तो यह कि इनमें हम कहीं नहीं, जबकि हमारे देशवासियों के पास ये सब खूबियां मौजूद हैं। हमारे व्यापारी इतने लोभी हैं कि घी में पशुओं की चर्बी मिला देते हैं। मावे में आलू और धनिये में गधे की लीद डालने में संकोच नहीं करते। लालच का आलम यह है कि आयकर बचाने के लिए इनकमटैक्स रिटर्न में जमकर हेराफेरी करते हैं। अहंकार में अपने नाच-गाने को दुनिया में सर्वोत्तम मानते हैं। अपने आगे किसी को कुछ मानते ही नहीं। पेटूपन की निशानी तो हमारे नेताओं और अफसरों की बढी हुई तोंद है। सदा फिट रहने वाले पुलिस वालों की तोंद भी सीमा से बाहर निकली रहती है। आलसीपन में तो हमारा मुकाबला नहीं। हमारा नारा है- 'आज करै सो काल कर, काल करै सो परसों; जल्दी जल्दी क्यों करता जब जीना है बरसों।'
अगर आलसीपन का आलम देखना है तो सरकारी कार्यालय में चले जाइए। इस मेज से उस मेज तक कागज पहुंचने में हफ्तों लग जाते हैं। क्रोधी तो हम जन्म से होते हैं। क्रोध में आकर किसी का खून तक कर देना हमारे बाएं हाथ का खेल है। ईष्र्या का आलम यह कि अपने भाई की उन्नति तक हमसे नहीं देखी जाती। दोस्ती का ढोंग करते हैं पर उसके पीठ पीछे अपने दोस्त की उतारने में कमी नहीं छोडते। और अभिमान तो हममें कूट-कूट कर भरा है। हल्दी की गांठ हाथ लगते ही हम अपने को पंसारी का बाप समझ लेते हैं। हमें तो लगता है कि इस सर्वे में फिरंगियों ने हमारे खिलाफ साजिश की है। वे हमारी उन्नति से चिढते हैं। दोषों की इस सूची में भ्रष्टाचार को शामिल क्यों नहीं किया गया।
हमें पूर्ण विश्वास था कि अगर भ्रष्टाचार इसमें शामिल होता तो हमें कोई नहीं पछाड सकता था। कैसे पछाडता। हमारे नेता, अफसर, कर्मचारी सब इस मामले में इतने सिद्धहस्त हैं कि पूछो मत। बगैर रिश्वत लिए हम अपने जीजा का काम भी नहीं करते। इस मामले में हम सबको बराबर मानते हैं। हम मन्दिर में भगवान के जल्दी दर्शन कराने के लिए भी रिश्वत ले लेते हैं। इन सब बातों पर गौर करें तो यह साफ जाहिर हो जाएगा कि हमारे साथ नाइन्साफी हुई है। खैर। कोई बात नहीं। आने वाले दिनों में हम पूरा प्रयास करेंगे कि हम कतई न पिछडें। हम प्राणप्रण से आगे बढने का प्रयत्न करेंगे। चाहे ओलम्पिक की रेस में हम पिछड जाएं, पर दोषों की दौड में किसी का बाप भी हमें नहीं पछाड सकता। आइए हम सामूहिक कोशिश करें कि हम सबसे बुरा बनने में आस्ट्रेलियाइयों को धोबीपाट मार दें । हमारे सामूहिक प्रयास अवश्य रंग लाएंगे। वैसे भी ईमानदारी, सच्चाई, नैतिकता जैसे गुणों को क्या शहद लगाकर चाटना है
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