मुंबई। अनुमानित सात अरब रूपए के व्यावसायिक प्रतिष्ठान लीलावती अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के नियंत्रण को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद ने शनिवार को यहां नया मोड ले लिया। अस्पताल के एक शीर्ष न्यासी ने अन्य न्यासियों को आडे हाथों लेना शुरू कर दिया है।
अस्पताल के स्थायी प्रबंध न्यासी निकेत वी. मेहता ने यहां एक वक्तव्य जारी कर कहा है कि वह पिछले सप्ताह उनके रिश्तेदारों चेतन मेहता, प्रबोध मेहता और रश्मि मेहता द्वारा जारी किए गए उस वक्तव्य से हतप्रभ हैं जिसमें कहा गया था कि वह इस संस्थान के न्यासी नहीं है।
निकेत मेहता पर पिछले सप्ताह बदमाशों ने हमला किया था। वह कहते हैं कि उन्हें 16 अक्टूबर, 2002 को न्यासियों के बोर्ड द्वारा पारित किए गए एक प्रस्ताव के तहत प्रबंध न्यासी व स्थायी न्यासी नियुक्त किया गया था। इसके उलट उन्होंने कहा कि बेल्जियम की एक अदालत ने प्रबोध मेहता को 1.7 अरब रूपए की जालसाजी का दोषी ठहराया था और उन्हें छह महीने की सजा हुई थी। इसके अलावा अदालत ने उन्हें 1.7 अरब रूपए का जुर्माना भरने के लिए कहा था।
निकेत मेहता कहते हैं कि भारतीय नियमों के मुताबिक किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति को न्यासी नहीं बनाया जा सकता और बाद में 17 मार्च, 2010 को महाराष्ट्र के सहायक आयुक्त दान (एसीसी) ने एक निर्णय दिया था कि वह न्यासी के रूप में अपना काम जारी रखने के लिए जबावदेह नहीं हैं। निकेत ने 21 जुलाई को आए एक फैसले के मुताबिक अस्तपाल के रोजमर्रा के कामों का प्रबंध करने वाली शक्तिशाली उप-समिति का विघटन कर दिया।
यह कार्रवाई इस आधार पर की गई थी कि उप-समिति के प्रमुख प्रबोध मेहता को बेल्जियम की एक अदालत ने दोषी ठहराया था और वह वित्तीय मामलों को संभालने या कार्यकारी निर्णय लेने के हकदार नहीं थे। निकेत मेहता कहते हैं कि प्रबोध मेहता एसीसी के निर्णय की अवहेलना करते हुए मुंबई के बांद्रा स्थित इस अस्पताल के न्यासी बने रहे। इसके बाद 23 जुलाई को अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित निकेत मेहता के कार्यालय में 16 बदमाश जबरदस्ती घुस गए और उन्होंने उन पर बुरी तरह हमला किया।
इस चौंकाने वाली घटना के कुछ घंटे बाद ही 24 जुलाई को उनके पिता विजय के. मेहता का निधन हो गया। पुलिस ने सात हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया और घटना के लिए कर्मचारी संघ की प्रतिद्वंद्विता को दोषी ठहराया है। लीलावती अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना 1997 में हुई थी और एक दशक से भी कम समय में यह मुंबई का एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र बन गया।