भारत और इजरायल में अच्छा लोकतंत्र
Thursday, 07 Mar 2013 1:00:41 hrs IST

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जयपुर। इजरायल के राजदूत एलॉन उशफिज ने कहा कि भारत और इजरायल ऎसे देश हैं, जहां लोग विरोध प्रदर्शन के बाद सुरक्षित घर पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक अच्छे लोकतंत्र की निशानी है। बुधवार को पत्रिका मुख्यालय, केसरगढ़ में 'इन कन्वर्शेसन विद एलॉन उशफिज' के मौके पर उशफिज ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से भले ही बड़ा अंतर हो लेकिन मूल्यों, लोकतंत्र की भावना, विकास और विरोध के नजरिए से कई समानताएं हैं। दोनों देशों के नागरिकों को विचार और तर्क के स्तर पर मजबूत बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे सामने कुछ क्षेत्रों में कई चुनौतियां भी हैं। यदि इन चुनौतियों का मजबूती से सामना किया गया तो 15 या 20 साल बाद तस्वीर बदल जाएगी।

कृषि पर जोर
कृषि के क्षेत्र में नई तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते हुए उशफिज ने बताया कि दोनों देशों के बीच कई साझा विकास प्रोजेक्ट चल रहे हैं। खासतौर पर राजस्थान के लिए उन्होंने कहा कि हम यहां के किसानों तक तकनीक पहुंचाना चाहते हैं जिससे उत्पादन में बढ़ोतरी हो। उसके बाद अपनी परिस्थितियों के अनुसार दाम तय किए जाएं।

कृषि और जल प्रबंधन पर फोकस करने के लिए इजरायल की ओर से राजस्थान में चार सेंटर खोले जाएंगे। इनमें किसानों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देने के अलावा वेस्ट वाटर को रिसाइकल कर उपयोग करने के बारे में भी सिखाया जाएगा। उशफिज ने कहा कि इजराइल को अपने जल प्रबंधन पर गर्व है, वहां 75 प्रतिशत पानी का दोबारा इस्तेमाल होता है। रिसाइकल की यह तकनीक हम यहां भी लाएंगे। इसके अलावा उशफिज ने बताया कि एक प्राइवेट कंपनी की मदद से जैसलमेर में खजूर उत्पादन भी किया जाएगा।

पुस्तकें भेंट की
कन्वर्शेसन के मौके पर पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने अपनी लिखी हुई पुस्तकों का एक सेट राजदूत एलॉन उशफिज को भेंट किया।

आज पहुंचेंगे बस्सी
बस्सी. ढिढ़ोल फार्म में गुरूवार को इजरायल राजदूत व प्रदेश के कृषि मंत्री हरजीराम बुरडक अनार की खेती का भूमि पूजन कर फार्म का निरीक्षण करेंगे। फार्म प्रभारी योगेश ने बताया कि गुरूवार दोपहर 3 बजे राजदूत,  उनके साथी यूरी राबर्डसन व कृषि मंत्री बुरडक फार्म में अनार की खेती के लिए भूमि पूजन करेंगे।

संसाधनों का इस्तेमाल
मौजूदा संसाधनों के इस्तेमाल के बारे में उशफिज ने कहा- 'मान लीजिए कि आपके पास संसाधनों की कमी है, लेकिन आपके पास जमीन, समुद्र और दिमाग है। यदि रिसर्च पर जोर दिया जाए तो मौजूदा संसाधनों से भी विकास संभव है।' उन्होंने बताया कि इजरायल में उच्च शिक्षा पाने वाले स्टूडेंट्स का प्रतिशत काफी ज्यादा है, जो कि रिसर्च पर जोर देते हैं और उस रिसर्च को जमीनी स्तर पर लागू किया जाता है।

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