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गुरुवार, 11 मार्च, 2010
इश्क के हार्मोन की हार्मोन
03 जनवरी 2010, 12:15 hrs IST
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आखिर क्यों कुछ लोग दूसरों से ज्यादा नरम मिजाज,दयालु और व्यवहार कुशल होते हैं दरअसल यह कमाल है ऑक्सीटॉसिन हार्मोन का जो बनाता है कुछ लोगों को ज्यादा उदार।

शुक्रिया अदा कीजिए भीडभाड से घिरी टिकट-खिडकी के क्लर्क का जिसने बिना झल्लाए मुस्कराहट के साथ आपका काम किया। शुक्रिया अदा कीजिए उस बस कंडक्टर का जिसने बस से उतरते समय आपको याद दिलाया कि उसे आपको एक रूपया देना है। शुक्रिया अदा कीजिए उस हर अजनबी का जिसने आपकी मदद की और उससे भी बढ कर शुक्रिया अदा कीजिए 'ऑक्सीटोसिन' हार्मोन का जिसकी बदौलत कुछ लोग दूसरों की अपेक्षा ज्यादा नम्र,दयालु और व्यवहार कुशल होते हैं।

जी हां 'लव हार्मोन' के रूप में पहचाने जाने वाले 'ऑक्सीटोसिन' पर हुए ताजा शोध कहते हैं कि यह हार्मोन अजनबी व्यक्तियों को भी भरोसेमंद बनाता है और सामाजिक मेल-जोल में इसकी अच्छी-खासी भूमिका होती है। ज्यूरिख विश्वविद्यालय में हुए इस अध्ययन के प्रमुख डॉक्टर थॉमस बॉमगॉर्टनर ने कहा, 'हम यह पहली बार जान पाए हैं कि जब ऑक्सीटोसिन विश्वास बढाता है तो वास्तव में दिमाग में क्या हो रहा होता है'

भरोसे का स्प्रे
दिमाग की इस 'हलचल' को पकड पाने से बहुत उम्मीदें जगी हैं। पहली तो यह कि इससे 'सामाजिक भय' को दूर किया जा सकेगा। बॉमगॉर्टनर का मानना है कि ऑक्सीटोसिन की कमी सामाजिक भय के कारणों में से एक है। उन्होंने इसे साबित करने के लिए एक खेल खेला। ये ऎसा खेल था जिसमें हिस्सा लेने वालों को अन्य लोगों पर भरोसा कर उन्हें अपने कुछ पैसे देने होते हैं और ये दूसरे लोग तय करते हैं कि उस पैसे के निवेश के बाद होने वाले मुनाफे को वह पैसे देने वाले लोगों को लौटाते हैं या नहीं। इस खेल में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों की एफएमआरआई (फंक्शनल मैगनेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) की गई। पता चला कि जिन लोगों ने 'ऑक्सीटोसिन' हार्मोन के स्प्रे को सूंघ लिया वे अनजान लोगों पर ज्यादा भरोसा करने लगे। वैज्ञानिकों को भरोसा है कि इस दवा से जहां भय और अविश्वास की सोच दूर की जा सकेगी,वहीं 'ऑटिज्म' जैसी दिमागी बीमारी से ग्रस्त लोगों का भी इस रसायनिक दूत से इलाज हो सकेगा।

लव हार्मोन का असर
रोमियो-जूलियट, लैला-मजनूं और इश्क की ऎसी ही मिसालें बेशक 'ऑक्सीटोसिन' के असर से बेखबर रही होगी लेकिन अटलांटा स्थित एमोरी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक इसी हार्मोन की बदौलत प्रेम को बढाने में जुटे हैं। अब इंसान के दिलो-दिमाग पर प्यार का बुखार चढाने और उतारने वाली दवा बनाने की तैयारी चल रही है। यूनिवर्सिटी के प्रो. लैरी यंग कहते हैं कि मानव मस्तिष्क  में तमाम हार्मोन के  बीच चल रही रासायनिक  क्रिया से प्यार, दया, नफरत जैसी भावनाएं पनपती हैं। उन्होंने मादा प्रेरी वोल (चूहों जैसे जीव) के  दिमाग में क्रमश: कुछ अतिरिक्त रसायन डालने और निकालने के बाद देखा कि मादा प्रेरी वोल दिमाग में ऑक्सीटोसिन हार्मोन पडते ही साथी के प्रति झुकाव महसूस करने लगती है। उन्होंने बताया कि  ऑक्सीटोसिन और डोपामाइन हार्मोन का मिश्रण तैयार कर दो व्यक्तियों के बीच वफादारी और समर्पण का भाव बढाया जा सकता है और यही नहीं हार्मोन के  बीच रासायनिक  क्रिया के  आधार पर आकर्षण खत्म करने वाली एंटी लव पिल्स भी बनाई जा सकती हंै।

लगाव भी, जलन भी
इंसान में प्यार और लगाव की भावनाएं पैदा करने वाला यह हार्मोन जब यह शरीर पर नकारात्मक प्रभाव छोडता है, तब इंसान ईष्र्या और द्वेष का शिकार बन जाता है। इजरायल के हेइफा विश्वविद्यालय के शोधकर्ता साइमन शेमे ट्सूरी ने अपने शोध के माध्यम से 'बायोलॉजिकल साइकेट्री' पत्रिका में यह रोचक खुलासा किया है। साइमन के मुताबिक, 'जब किसी इंसान का साथ सकारात्मक होता है तो ऑक्सीटोसिन उसके शरीर पर सकारात्मक प्रभाव छोडता है लेकिन जब उसका साथ किसी नकारात्मक व्यक्ति से होता है, तो यही हार्मोन नकारात्मक भावनाएं भडकाता है।' साइमन ने यह खुलासा 56 व्यक्तियों पर किए गए शोध के आधार पर किया है। शोध में इन्हें ऑक्सीटोसिन की गंध सुंघाने के बाद एक खेल में हिस्सा लेने को कहा गया। इस खेल में कम धन जीतने वाले खिलाडियों को ईष्र्या से भरा पाया गया।

अब क्या शर्माना
बिहेवियरल साइंटिस्ट्स का कहना है कि ऑक्सीटोसिन जरूरत से ज्यादा शर्मीले स्वभाव को कंट्रोल करने में असरदार साबित हो सकता है। अमरीका के कैलिफॉनिया की क्लेयरमॉन्ट ग्रेजुएट यूनिवर्सिटी में चल रहे रिसर्च में साबित हुआ है कि ऑक्सीटोसिन घबराहट को कम कर देता है। ये उनकी भी मदद कर सकता है जो लोगों की भीड के बीच शर्म-संकोच का शिकार हो जाते हैं। इन्हीं खूबियों की वजह से ऑक्सीटोसिन का अब कमर्शियल उपयोग विकसित किया जा रहा है। पत्रिका नेचर में अमरीका में एटलांटा की एमोरी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लैरी यंग ने लिखा है कि यह हार्मोन भरोसे को बढाता है और भय को भगाता है। अमरीका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में इंटरनेशनल साइंटिस्ट अब इस हार्मोन की कमर्शियल फॉर्म को विकसित करने की जुगत में हैं। उन्हें उम्मीद है कि शर्मीलापन दूर करने के लिए अगर इस हार्मोन की सहायता से 'लव पिल' बना ली जाती है।

रासायनिक दूत है हार्मोन
हार्मोन जटिल कार्बनिक पदार्थ हैं जो सजीवों में होने वाली विभिन्न जैव-रसायनिक क्रियाओं, वृद्धि एवं विकास, प्रजनन आदि का नियमन तथा नियंत्रण करता है। ये कोशिकाओं तथा ग्रन्थियों से स्त्रावित होते हैं। इन्हें शरीर में अधिक समय तक संचित नहीं रखा जा सकता है, अत: कार्य समाप्ति के बाद ये नष्ट हो जाते हैं एवं उत्सर्जन के द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिए जाते हैं। हार्मोन साधारणत: अपने उत्पत्ति स्थल से दूर की कोशिकाओं या ऊतकों में कार्य करते हैं इसलिए इन्हें रासायनिक दूत भी कहते हैं। इनकी सूक्ष्म मात्रा भी अधिक प्रभावशाली होती है। हार्मोन की कमी या अधिकता दोनों ही बॉडी सिस्टम को प्रभावित करती है।

अमित पुरोहित
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