hindi news

 
सोमवार, 15 मार्च, 2010
साहित्य वर्तमान का दस्तावेज
07 फरवरी 2010, 10:47 hrs IST
ईमेल | प्रिंट | कमेंट | टेक्सट  min  max | Bookmark and Share
Left
malti joshi
Left
मशहूर कथाकार मालती जोशी की कहानियों मेे मध्यमवर्गीय लोगों की जिंदगी की झलक बखूबी देखी जा सकती है। इन्होंने मध्यमवर्गीय महिलाओं को केन्द्रित रखकर कई कहानियां लिखी हैं। यहां पेश हैं मालती जोशी से हाल ही हुई बातचीत के प्रमुख अंश।

आपने कहानियों में समाज की नारी की स्थिति को सुदृढ बनाने की पुरजोर वकालत की है।
 जो लोग नारी-मुक्ति का परचम लेकर चलते हैं, उनसे भी कहना चाहती हंू कि स्वतंत्रता और स्वच्छंदता में बहुत अंतर है। समाज में सुधार तो लाना है पर वह समाज में रहकर ही लाने होंगे। समाज में व्याप्त कई कुरीतियों के खिलाफ मैंने आक्रोश व्यक्त किया है, पर संयम कभी नहीं तोडा। विधवा नारी की स्थिति को लेकर मन में हमेशा एक रोष रहा है। दर्जनों कहानियां इस विषय पर लिख डाली हैं- कवच, परंपरा, राखोलाज हरि, स्मृति कल्प, जागी आंखों का सपना, आ अब लौट चलें आदि।
 कमाऊ पत्नी को सिर्फ रूपया कमाने वाली मशीन समझने वालों को भी मैंने नहीं बख्शा है। बहुरि अकेला, बोल री कठपुतली, पंख तौलती चिडिया, गणित आदि कहानियों में इस प्रवृत्ति पर चोट की है।

आपने मध्यवर्ग को ही अपनी कहानियों में क्यों चुना
मैं मध्यम वर्ग परिवार में पली बढी और ब्याही गई। पिता जज थे और 6-7 भाई-बहनों का लंबा-चौडा परिवार था। हर चीज हिसाब से ही मिलती थी। इतने बडे परिवार में प्रचुरता संभव भी नहीं थी। इंजीनियर पति का बचपन कष्टों में बीता था। 5-6 वर्ष की उम्र में पिता की असमय मृत्यु के कारण बाकी भाई लोग पढ नही पाए थे। पर इस भाई को पढाने का उन लोगों ने संकल्प लिया था। अनेक नौकरियां करने के बाद वे 28 वर्ष की आयु में इंजीनियर बने थे। बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त साधन होने के बावजूद अतिरिक्त वैभव नहीं था। इसीलिए मेरी कहानियों में मध्यमवर्गीय परिवारों की ही दास्तान होती है, क्योंकि यह मेरी जानी-पहचानी दुनिया है।

क्या उम्र का असर आपके लेखन पर पडा है
लिखने का कोई बंधा-बंधाया समय नहीं है। जब घर में शांति हो, मन पर किसी काम का बोझ न हो, मैं लिखने बैठ जाती हूं। खाना बनाना मुझे अच्छा लगता है। रसोई से निबट एक दो घंटा बैठ जाती हूं। जरूरी नहीं कि रोज साहित्य-सृजन ही हो। पत्र भी लिखने होते हैं। शाम को कॉफी पीकर एकाध घंटा लिख लेती हूं। पत्र लिखना आज भी जारी है। अपनी रचनाएं आज भी हाथ से लिखकर व साथ में वापसी का टिकट लगा लिफाफा भेजती हूं। मेरे पास अभी तक के प्राप्त पत्रों का संकलन रखा है। मैं हर साल के पत्रों को सुरक्षित रखती हूं।

लोग कहते हैं कि आपने अपने परिवेश को कभी नहीं छोडा
कोई भी संवेदनशील व्यक्ति अपने परिवेश से कटकर नहीं रह सकता, अपने आसपास को अनदेखा नहीं कर सकता। लेखक की रचनाओं में उसका पास-पडौस, उसका जीवन-स्तर जरूर झांकता है। परिवेश से व्यक्ति कभी नहीं कटता। मैं मध्यम वर्ग से आती हूं इसीलिए मेरे लेखन में वह साफ झलकता है।

पुरस्कार साहित्यकार के लिए क्या मायने रखता है
सम्मान से हमें अपने होने का आभास होता है। मुझे 'मध्यप्रदेश शिखर सन्मान', मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन का 'भवभूति' अलंकरण पुरस्कार,  'अहिन्दी भाषी' लेखिका के रूप में सम्मान, मराठी पुस्तक 'पाषाण' के लिए महाराष्ट्र शासन का पुरस्कार, रचना पुरस्कार,अक्षर आदित्य सम्मान मिले हैं। प्रभाकर मावचे पुरस्कार मराठी साहित्य अकादमी इंदौर द्वारा दिया गया।

आप अपनी आलोचना को किस तरह लेती हैं
मेरी भी आलोचना होती है। संकुचित हंू, घर से निकलती नहीं, सीमित क्षेत्र है। वरिष्ठ लेखकों को लगता है कि मेरी कहानियों में भाषा व कथ्य सरल है, अत: उन्हें लगता होगा की मेरी रचनाओं में कुछ नहीं है। मैं बूढी हो रहीं हूं, कहांनियों में भी यह झलकने लगा है। इस तरह की काफी आलोचना होती  रही है, लेकिन लोगों को मेरी कहानियां अपने घर की कहानी लगती है। इस कारण मेरा पाठक वर्ग हैं, और यही मेरा बल है।

कोई ऎसा लेखक जिससे मिलने की तमन्ना पूरी न हुई हो
हां मेरे पसन्दीदा लेखकों में शिवानी जी प्रमुख हैं , उनसे ंमुलाकात दो बार हो गई। लेकिन कुमार गन्धर्व जी से मिलने की तमन्ना अधूरी रह गई, मेरा ही संकोच था या पता नहीं क्या। मेरे 75 वें जन्मदिन पर मेरे बच्चों ने कुमार गन्धर्व जी के गीतों को तोहफे में दिया है। मन प्रसन्न है।

आज के रचनाकार की स्थिति पर आप क्या कहेंगी, साहित्य की गुणवत्ता पर आपका नजरिया
बदलते समय के साथ कहानी का परिदृश्य बदलना लाजमी है। 21वीं सदी में बैठकर हम 16वीं सदी की कहानी तो नहीं लिख सकते। लिख भी लें तो उसे पाठक नहीं मिलेंगे। आज पौराणिक कथाएं भी लिखी जा रही हैं तो उनके लिए आधुनिक सन्दर्भ खोजे जाते हैं। आज जीवन के हर क्षेत्र में बदलाव आया है। रोज नए क्षितिज खुल रहे हैं, नई उपलब्धियों से परिचय हो रहा है। इन सबका परिणाम साहित्य पर भी पडेगा ही। क्योंकि साहित्य क्या है। वर्तमान का दस्तावेज ही तो है।

कहा जाता है कि महादेवी वर्मा और निरालाजी का रहस्यवाद व छायावाद का युग था, बच्चनजी का समय हालावाद रहा, आज आप इस समय को किस वाद में मानती है
कालजयी किताब लिखना आज सम्भव नहीं है, कह नहीं सकते कौनसा समय चल रहा है इसे क्या प्रगतिवाद कहे या विवादवाद कुछ समझ नही ंआता । मेरा मानना यह है कि आप लिखते रहें फिर किस धारणा में आपको डालना है यह आपकी जमात तय करेगी।

आपका नया क्या आ रहा है
कहानी की किताब आ रही है। आजकल तो नया जो मिलता है लिखती रहती हूं, प्रस्तावना व चिटी रेगुलर लिख रही हूं।

प्रकाशित साहित्य
हिन्दी की लगभग सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां एवं लघु उपन्यास प्रकाशित।
चालीस से भी अधिक पुस्तकें प्रकाशित। उपन्यास एवं विविध कथा संग्रहों के अलावा 8 मराठी कथा संग्रह, एक गीत संग्रह भी इसमें शामिल हैं।
कुछ कहानियों का रंगमंचीय रूपांतर कर उन्हें एवं रंगमंच पर प्रस्तुत किया गया, जिनमें  'मां तुझे सलाम' उल्लेखनीय हैं।

मध्यवर्ग में शादी की समस्या को आपने विभिन्न रूपों में उठाया है
मध्यवर्ग में शादी की समस्या भी अपने ढंग की होती है। वहां लोग पैसे के लिए बेटी का सौदा तो नहीं करते पर दामाद खरीदने में उनके पसीने छूट जाते हैं। अनब्याही पीर, यातना चक्र, पहली बार आदि कहानियों में इसी बात का वर्णन है। बेटी की कमाई के लालच में उसकी शादी को टालने की प्रवृत्ति भी आजकल बहुत बढ गई है। इस पर मैंने दर्जनों कथाएं लिखी हैं-आखरी सौगात, गणित, चाहत, आउटसाइडर आदि के नाम इस संदर्भ में लिए जा सकते हैं।

अंजना सवि
More Stories
srijan-vishawa news हार-जीत
srijan-vishawa news नाइजीरियाई लोगों का रचनाकार
srijan-vishawa news शायरी दिलों को जोडती है
srijan-vishawa news कैसे हो बेहतर तरह से काम
srijan-vishawa news साहित्य को कोई सम्मान नहीं देता
srijan-vishawa news नगीब महफूज
srijan-vishawa news प्रेम कहानी... जिनकी है दुनिया दीवानी
srijan-vishawa news प्रेम की लघु कथाएं
srijan-vishawa news आई लव यू
srijan-vishawa news सुख,स्वतंत्रता और देश
srijan-vishawa news विदेशों में भारतीय सांस्कृतिक विरासत
srijan-vishawa news आद्या
srijan-vishawa news प्रेम और वात्सल्य की कवयित्री
srijan-vishawa news कालिदास मेरे रचना आराध्य
srijan-vishawa news शिक्षा और प्रलय के बीच एक रेस
Most Read Stories
News Headlinesनगीब महफूज
News Headlinesशायरी दिलों को जोडती है
News Headlinesसाहित्य को कोई सम्मान नहीं देता
News Headlinesकैसे हो बेहतर तरह से काम
News Headlinesहार-जीत