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सोमवार, 15 मार्च, 2010
हिंदुस्तान बना यंगिस्तान
10 जनवरी 2010, 10:39 hrs IST
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हिंदुस्तान दिन ब दिन युवा होता जा रहा है। यकीन न आए तो अपने इर्द-गिर्द के माहौल पर नजर डालें। खेल, व्यापार, मनोरंजन से लेकर राजनीति, लेखन तक ऎसा कोई क्षेत्र नहीं बचा जहां युवाओं ने अपनी धमाकेदार उपस्थिति नहीं दिखाई हो।

खेल में छाया युवा जोश
खेल जगत में युवाओं के बगैर मैदान आबाद होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। क्रिकेट में धोनी, सचिन और सहवाग अब पुराने हुए। आज जमाना है ईशांत शर्मा, विराट कोहली, दिनेश कार्तिक सरीखे युवा खिलाडियो का। जहां क्रिकेट में युवा खिलाडी अपना दम दिखा रहे हैं उसी तरह टेबल टेनिस, मुक्केबाजी, शूटिंग जैसे खेलों में भी युवा पौध रंग में आ रही है। सायना नेहवाल, विजेंद्र सिंह, अभिनव बिंद्रा, सुशील कुमार और विश्वकप निशाने बाजी में पहली दफा स्वर्ण और कांस्य एक साथ दो पदक जीतने वाले गगन नारंग को कौन भूल पाएगा। यूकी भांबरी ने ऑस्ट्रेलियन ओपन में जूनियर ब्ाॉयज का खिताब जीत देश का नाम रोशन किया है। इसी प्रकार बीजिंग में आईएसएसएफ विश्वकप प्रतियोगिता में हिना सिद्धू ने भी महिलाओं की एयर पिस्टल स्पर्द्धा में रजत पदक जीतकर युवा शक्ति में महिलाओं के महžव को दर्शा दिया। यानी खेल में युवा शक्ति पूरे उफान पर है।

जवां हुआ फिल्मिस्तान
युवाओं की जमात ने रूपहले पर्दे पर भी अपनी धमाकेदार हाजिरी दर्ज करवाई। रणवीर कपूर, शाहिद कपूर, जेनेलिया डिसूजा, मिनिष्ाा लांबा से लेकर श्रुति हसन, सोनम कपूर ऎसे युवा हैं, जिनके लोग दीवाने बने हुए हैं। युवा वर्ग इन कलाकारों में अपनी छवि देखता है। मंसूर खां की 'जाने तू या जाने ना' में आमिर खान के भतीजे इमरान ने जो काम किया उससे युवा वर्ग उनका दीवाना हो गया। अभिनय के अलावा संगीत में भी टेलेंट शो की खोज राजा हो या तोषी या फिर मोहित चौहान सब जगह यंग ब्रिगेड अपना जादू बिखेर रही है। इंडियन पॉप के नवोदित गायक मोहित चौहान के 'रंग दे बसंती', 'जब वी मेट' फिल्मों में गाए गीत युवाओं की जुबां पर चढे हुए हैं। तमिल फिल्मों के गायक युवान शंकर राजा भी आज दक्षिण में युवाओं के चहेते गायक हैं। नए कलाकारों के आने से पुरानी पीढी को आराम मिला है, वहीं विरासत को मजबूत युवाओं के हाथों में सौंपकर तजुर्बेकार सितारे भी निश्चिंत हो गए लगते हैं। लिहाजा कह सकते हैं फिल्मीस्तान अब यंग हो रहा है।

राजनीति पर उत्साह भारी
अब तक राजनीति में अनुभव को तरजीह दी जाती थी। लेकिन यहां भी अब परिवर्तन दिखाई दे रहा है। नए और ताजगी भरे चेहरे इस क्षेत्र में भी अनुभव को मात दे रहे हैं। दोनों प्रमुख दलों के कर्ता -धर्ता युवा हैं। महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे नितिन गडकरी हों या फिर कांग्रेस में राहुल गांधी। युवाओं के कमान संभालने के बाद दोनों दलों में परिवर्तन स्पष्ट नजर आने लगा है। केंद्र में सबसे कम उम्र की राज्य मंत्री अगाथा संगमा तो अभी केवल 29 साल की हैं। वे पंद्रहवीं लोकसभा में तुरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुनी गई हैं। इसी प्रकार नवीन जिंदल, भंवर जितेंद्र सिंह, प्रदीप जैन, डॉ ज्योति मिर्घा, सिद्धि कुमारी आदि जोशीले चेहरों के आगे सांसद ज्योतिरादित्य सिंघिया, सचिन पायलट जैसे नाम भी पीछे छूटने लगे हैं। ये वे युवा हैं, जिन्हें राजनीति में देखकर आम युवा राजनीति पर आक्षेप नहीं लगाता और उम्मीद करता है कि आने वाले वर्षो में उनका प्रतिनिघित्व सही साबित होगा।

बिजनेस टायकूंस बनेंगे युवा
बिजनेस ऎसा क्षेत्र है जहां युवाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है। युवा ही हैं जिनकी बदौलत आज देश में 'इंडिया शाइन' का नारा बुलंद हुआ है। अंबानी बंधु हों या फिर अजयपाल बांगा। ऎसे नाम हैं जिन पर उद्योग जगत गर्व करता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने तो युवा उद्योगपति मुकेश अंबानी को भारत का आर्कीटेक्ट ही कह डाला। अजयपाल बांगा वह शख्स है जो मंदी के भयानक दौर में भी अपनी प्रतिभा के बूते 90 करोड रूपए के पैकेज पर के्रडिट कार्ड कंपनी मास्टर कार्ड में सीईओ बनाए गए। झारखंड के अनुराग दीक्षित आज अपने बूते जिब्राल्टर के सबसे धनी व्यक्ति हैं और फिलहाल पार्टी गेमिंग बिजनेस में नाम कमा रहे हैं। दीपाली गोयनका का नाम आज पहचान का मोहताज नहीं है। मनोविज्ञान स्नातक दीपाली कत्थक में जयपुर घराने से दीक्षित हैं वहीं वेल्सपन रीटेल लिमिटेड की निदेशक के रूप में काम देख रही हैं।

साहित्य पर भी छाया
नौजवानों का खुमार
कहते हैं जितना अनुभव होता है कलम में धार उतनी ही तेज होती है। यह बात भी युवाओं ने झुठला दी है। चेतन भगत के उपन्यास 'फाइव पॉइंट सम वन' पर बनी 'थ्री इडियट्स' देश के युवाओं को खासी पसंद आ रही है। बुकर पुरस्कार विजेता और युवा उपन्यासकार किरण देसाई का नाम भी हर युवा की जुबां पर है। अरूंधति राय के उपन्यास को भी लोगों ने खूब पसंद किया। पटकथा लेखक पिनाकी घोष, शॉर्ट स्टोरी और ट्रेवल लेखक और विंडो सीट की कृतिकार जाह्नवी अचरेकर, काव्या रंगनाथन, विज्ञान लेखक बिप्लव दास, गोस्ट राइटर अनिंद्य सुंदर आदि युवा लेखकों की कितनी ही लंबी फेहरिस्त है, जो लेखन सागर में युवाओं को गोते लगवा रहे हैं। साहित्य में बढते युवा दखल को देखकर लगता है कि आने वाले वक्त में साहित्य की कमान भी युवा हाथों में ही होगी।

 नितेश सोनी
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