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रविवार, 14 मार्च, 2010
टीवी पर बनी दुल्हन
06 जनवरी 2010, 11:22 hrs IST
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Fashion designer Roopa Rai
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पहले शादी के बारे में क्या सोचती थीं
हर लडकी अपनी शादी के बारे में सपने देखती है, मैं भी देखती थी। लेकिन यह पक्का था कि मैं अरेंज्ड मैरिज करूंगी। हां मैं इतना चाहती थी कि मेरा पति दोस्त की तरह हो, जिसके साथ मैं अपने दुख-सुख दोनों बांट सकूं और वह जॉली नेचर वाला हो।

 इस शो के लिए सलेक्शन कैसे हुआ था
मेरे घरवालों ने एक मेट्रीमोनियल वेबसाइट पर मेरा प्रोफाइल डाला था। हालांकि रिश्ते तो वैसे भी आ रहे थे लेकिन बैटर चॉइस के लिए ऎसा किया था। इसी से मुझे ऑडिशन के लिए बुलावा आ गया। सिंपल-सा ऑडिशन था, उसमें मेरा सलेक्शन हो गया।

 शो में गई, तो क्या सोचा था
यह शादी का शो था। इसलिए इसे सिर्फ करके देखने वाली बात नहीं सोची थी। यहां इमेज की बात थी जिसका असर बाद में बाहर भी पडता। मैंने सोचा कि यहां 5 ऑप्शन हैं। यदि इनमें से पसंद आने पर किसी को जीवनसाथी चुन लेती हूं तो ठीक है, वरना यहां दुनिया खत्म नहीं हो जाती। यह दुनिया बहुत बडी है जहां लिखा होगा, होगा तो वहीं। इसलिए तनाव बिल्कुल नहीं था।

 हितैष में ऎसा क्या लगा, जो वह पसंद आया
वह दिल का साफ है, सच्चा है। हां, कहीं न कहीं डर था कि जरूरी नहीं कि वह जो दिखा रहा है, असल में भी वही हो। लेकिन धीरे-धीरे लगने लगा कि वह सही है। तब हम दोनों ने सोच लिया था कि यदि शो में शादी नहीं होगी तो बाहर जाकर कर लेंगे।

 'राखी का स्वयंवर' में राखी की शादी नहीं हुई। इस शो में आपकी हो गई है। कैसा लगा
बहुत ही अच्छा लग रहा है। हालांकि जब यह शो शुरू  हुआ था तभी 'राखी का स्वयंवर' खत्म हुआ था। इसलिए मुझे भी लग रहा था कि शायद इसमें भी अंत में शादी नहीं होगी। वैसे इसमें भी हम पर कोई दबाव नहीं था कि शादी करनी ही है, पर हमारी जोडी बनी और शादी भी हो गई। शादी के समय हमारे दोनों ओर के सभी करीबी रिश्तेदार मौजूद थे। तब लगा ही नहीं कि शादी टीवी पर हो रही है। लगा कि शादी घर पर ही हो रही है। शादी पूरी तरह हिंदू रीति-रिवाजों से हुई।

 खुद के अंदर परफेक्ट ब्ा्राइड के क्या गुण देखती हैं
परफेक्ट ब्ा्राइड होने के लिए कोई एक्स्ट्रा आर्डिनरी गुण नहीं चाहिए। मैं खुद को परफेक्ट ब्ा्राइड नहीं मानती। हर लडकी की शादी होती है। वह कितनी परफेक्ट है, इस बात का पता शादी के बाद ही लगता है। यहां शादी से पहले हम दोनों की कुंडलियां-टेवे मिलाए गए जिसमें हमारे 27 गुण मिले। लेकिन गुणों की असली परीक्षा शादी के बाद ही होती है। अलग-अलग हालात का सामना करना और उनसे निपटना ही बताएगा कि मैं कितनी परफेक्ट हूं।

फ्यूचर प्लान
सबसे पहले हम वैष्णो देवी जाना चाहते हैं। हनीमून पर कहां जाएंगे, यह अभी नहीं सोचा है। हां, शादी का एक रिसेप्शन इलाहाबाद में होगा और एक चंडीगढ में। अभी तो फैशन डिजाइनिंग ही करूंगी। मुझे परफेक्ट ब्ा्राइड का लेबल मिल गया है। अब मेरे नाम से भी मेरा अपना बिजनेस चल सकता है। शायद अब दिल्ली की जगह चंडीगढ में रहकर ही यह काम करू ं।

प्रदीप सरदाना
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